कब्‍ज को दूर करने के 8 कारगर आयुर्वेदिक उपाय

कब्‍ज का होना आज के समय में आम समस्‍या बन गई है, हमारा हर दिन का खान-पान कारण होता है। आयुर्वेद में कब्‍ज को शरीर के वात दोष से जोड़ा जाता है। आयुर्वेदिक उपचार से थोड़ा देर से राहत मिलती है , यह प्राकृतिक होने से यह शरीर में कोई भी साईडइफेक्‍ट नहीं होता है। आईये जाने कब्‍ज को दूर करने के असरदार आयुर्वेदिक उपाय।

1. गर्म पानी पीयें

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यदि सुबह-सुबह खाली पेट गर्म पानी  पीया जाए तो कब्‍ज से राहत मिल सकती है। हल्‍का गुनगुना पानी पीने से शरीर के पाचन तंत्र को सक्रिय करता है, गर्म पानी पीने से आंतों में फसे बेकार पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है ,पेट में जितने भी मांसपेशियां होती है उसको आराम देता है। सुबह शुरुआत में गर्म पानी पीये तो यह  पाचन तंत्र को बेहतर और 24 घंंटें के लिए तैयार करता है। यदि आप हर दिन गर्म पानी पीयें तो इसके लाभों का अनुभव होंंगा। यह भी पढ़े- गुड़ खाने से बढ़ता है सेक्‍स पावर

2.त्रिफला चूर्ण का उपयोग

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त्रिफला चूर्ण को आयुर्वेद में अनमोल खजाना के रूप में जाना जाता है, यह कब्‍ज को दूर और पाचन तंत्र को तंदरुस्‍त करता है। त्रिफला चूर्ण को रात को सोने से पहले मिडियम गर्म पानी में या दूध के साथ मिलाकर लेने से आतों में जमा बेकार मल को बाहर निकालता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। त्रिफला चूर्ण का नियमित उपयोग से कब्‍ज के साथ-साथ अपच ,एसिडिटी  और पेट फूलने की समस्‍याओं से राहत प्रदान करता है।

उपयोग

  • सोने से पहले त्रिफला चूर्ण को गुनगुना पानी या गुनगुना दूध के साथ मिलाकर पीयें।
  • धीरे-धीरे पीयें और हर दिन इसका सेवन करें ।
  • इसको पीनें से दस्‍त का अनुभव शुरूआती दिनों में हो सकता है। घबराना नहीं है, यह शरीर को भीतर से सफाई प्रक्रिया का संकेत है।

सलाह

  • बच्‍चे और गर्भवती महिलाओं को त्रिफला चुर्ण का सेवन डॉक्‍टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए।
  • इसे कम मात्रा में लेना चाहिए क्‍यों कि अधिक सेवन से निर्जलीकरण हो सकता है।

3.घी और दूध 

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सोने से पहले गर्म दूध में एक चम्‍मच घी मिलाकर पीने से कब्‍ज की समस्‍या दूर हो जाती है। यह आंंतो में चिकनापन लाता है । जिससे मल त्‍याग आसानी से हो जाता है। यह गहरी नींद में भी सहायक है।

4. फलों का सेवन

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पपीता , अमरूद और केला जैसे फल पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है । इन फलों  में कुछ ना कुछ खास होता है, जैसे पपीता में पपाइन एंजाइम होता है जो खाना को पचाने में सहायक होते है। और आंतो की भी सफाई करता है। और अमरूद में फाइबर काफी मात्रा में होता है, जो मल को लचीला और पास कराने में मदद करता है। यह भी पढ़ें-खाली पेट किशमिश खाने के 10 बड़े फायदे

5. हर्बल चाय

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हर्बल चाय एक आयुर्वेदिक उपाय है जो कब्‍ज को दूर करने में सहायक है। हर्बल चाय में सौंफ,जीरा और अदरक आदि का मिश्रण से बनाया जाता है जो पाचन क्रिया को सुधारने में मदद करती है। सौंफ पेट के गैस को कम करती है और जीरा पाचन क्षमता को बढ़ाता है। और अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो जलन को कम करता हैै।

6. व्‍यायाम

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यदि व्‍यायाम को हर दिन 30 मिनट किया जाए  तो शरीर में आने वाली बीमारी या समस्‍या दूर हो जाएगी । व्‍यायाम से पाचन तंत्र बेहतर होता है। व्‍यायाम में योगासन, पवनमुक्‍तासन,भुजंगासन और बालासन, आंतों को सक्रिय करने में मदद करते है और पाचन तंत्र को अच्‍छा बनाते हैं। व्‍यायाम से मांसपेशियों बेहतर और रक्‍त संचार बढ़ता है।

7. आंवला

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आंवला में पाये जाने वाला एंटीऑक्सिडेंटस और विटामिन C प्रचुर मात्रा में होता है, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाने के साथ-साथ कब्‍ज ,एसिडिटी  और पाचन संबंधी अन्‍य समस्‍याओं को दूर करने में सहायक है।

8. पाईबर आहार

हरी सब्जियां, अनाज,दाल और फलों जैसे सेब ,अमरूद और पपीता जैसे फल जो फाइबर ज्‍यादा मात्रा में पाया जाता है।  यदि हर दिन फाइबर युक्‍त आहार का सेवन किया जाए तो आंतों की सफाई  और कब्‍ज की समस्‍या दूर करती है।

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